SHAME
हमारे बिहार के गांवों में शादी ब्याह में बारात के अलावा 1-2 नही 5-6 गाँवों, लगभग पूरी पंचायत को निमंत्रण होता है... इसके अलावा शहरी गेस्ट्स, रिश्तेदार नाते सैंकड़ो होते हैं... कई क्षेत्रों में 8 गँवा (8 गाँव) को एक साथ खिलाने का चलन है। मतलब 3-4 हजार लोग भोज में आते ही हैं... 8 गाँव वाले में तो 10 हजार+ आते हैं..... 3-4 दिन पहले चूल्हा जोड़ा जाता है उसके पहले भी शादी व्याह में माहौल ऐसा रहता है कि शादी के हफ्ते भर पहले से ही हित-नाता, गाँव-ग्राम के लोग जिनकी संख्या 100 से अधिक ही होती है उनके लिए दो टाइम सामान्य भोजन उपलब्ध होता ही है.... गांवों में शादी के सीजन में हर महीने किसी न किसी परिवार में ये माहौल देखने को मिलता ही है.... वहां कभी नही सुना कि कोई बिना निमंत्रण भी आ गया हो तो उसे खाना नही ख़िलातें.... इनफैक्ट शादी ब्याह के बाद भी कई दिनों तक गाँव के लोगों को मिठाइयाँ ख़िलातें हैं, हित-नाताओं के अलावा अपने जन-मजदूरों को मिठाइयाँ आदि बांटते ही रहते हैं.... ये कोई लिखित या पारंपरिक रिवाज नही है बल्कि सामाजिकता है जिसे गांवों ने संजो रखा है... ऐसा इसलिए भी संभव है क्योंकि वहां लोग एक दूसरे के लिए खड़े होते है ऐसे मौकों पर न कि व्यस्था कैटरर्स के हाथों में होती है और हिसाब पर प्लेट के हिसाब से लगता है।
पिछले दिनों दो वीडियो वायरल हुई... पहला बिहार से था दूसरा MP से... बिहार में जो छात्र बिना निमंत्रण खाने को गया उसे दूल्हे ने कहा कि अपने होस्टल के साथियों के लिए भी पैक करवा कर ले जाओ पर MP में जो छात्र बिना निमंत्रण के गया उससे वहां के मेजबान ने प्लेट धुलवाया और उसे अपमानित करने के उद्देश्य से वीडियो बनाया।
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