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VITAMIN B-12

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अगर अक्सर हमें हाथ और पैरों में झनझनाहट ,खून की कमी/हीमोग्लोबिन की कमी और थकान जैसी चीज हो जाए तो हम ज्यादा ध्यान नहीं देते परंतु हो सकता है कि यह एक सबसे महत्वपूर्ण विटामिन बी12 के कमी के कारण हो I आज के पोस्ट में हम (part- 1)विटामिन बी12 के वाले कमी से होने वाले लक्षण को देखेंगे अगले पोस्ट (Part-2)में हम इसके उपचार को देखेंगे  I विटामिन बी 12 को "कोबालमीन" भी कहा जाता है, एक आवश्यक पोषक तत्व है जो विभिन्न शारीरिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन, हेल्दी नर्वस सिस्टम के रखरखाव और डीएनए के काम के लिए आवश्यक है. क्योंकि हमारा शरीर खुद विटामिन बी 12 का उत्पादन नहीं कर सकता है, इसलिए हमें इसे आहार के जरिए प्राप्त करना होता है I 🟡 इसके कमी से होने वाले लक्षण - 1. हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्न पड़ना - विटामिन बी 12 नसों के ऊपरी परत (myelin sheath -( नीचे फोटो में दर्शाया गया ⬇️) के लिए बहुत जरूरी हैI अगर विटामिन बी12 की कमी हो जाए तो यह  परत डैमेज हो जाती है और नसों को अच्छी तरह के सिग्नल नहीं मिल पाता , जिससे हाथ-पैरों म...

𝐓𝐇𝐄 𝐑𝐄𝐀𝐋𝐈𝐓𝐘 𝐎𝐅 𝐈𝐒𝐑𝐀𝐄𝐋-𝐏𝐀𝐋𝐄𝐒𝐓𝐈𝐍𝐄 𝐂𝐎𝐍𝐅𝐋𝐈𝐂𝐓 𝐓𝐇𝐀𝐓 𝐍𝐎 𝐎𝐍𝐄 𝐖𝐈𝐋𝐋 𝐓𝐄𝐋𝐋 𝐘𝐎𝐔!

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  14 May 1948 : British Mandate Palestine (Under British Control) was divided between Israel and Arabs. 15th May 1948 : Egypt, Transjordan, Syria, and expeditionary forces from Iraq entered Palestine.  The invading forces took control of the Arab areas and immediately attacked Israeli forces and several Jewish settlements But after 9 months of war, Israel ended winning the war against Arabs and regained the UN Proposed Jewish State and took over 60% of the Arab State as well. 5th June 1967 (6 Days war) : 6 Arab Nations closed Straits of Tiran and was ready to destroy Israel. But again the Israel Intel was too strong and they launched a series of preemptive airstrikes against the collation of Arab countries. Again after the end of the war, Israel captured Golan Heights, Gaza and West Bank. The war ended in 6 days. 1993 OSLO Peace Accords : Israel and Palestine tried to settle the dispute with the help of the US. But could not reach the solution. Israel was ready to ...

AYURVEDA SOLUTION TO HEART ATTACK

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जय सियाराम 🙏 समझ लीजिए हार्ट अटैक: भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे। नाम था महाऋषि वागवट जी उन्होंने एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम है, अष्टांग हृदयम Astang hrudayam इस पुस्तक में उन्होंने बीमारियों को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखें थे।  यह उनमें से ही एक सूत्र है। वागवट जी लिखते हैं कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त blood में acidity अम्लता  बढ़ी हुई है अम्लता आप समझते हैं जिसको अँग्रेजी में कहते हैं acidity अम्लता दो तरह की होती है एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त blood की अम्लता आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही है, खट्टी खट्टी डकार आ रही हैं , मुंह से पानी निकल रहा है और अगर ये अम्लता acidity और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता blood acidity होती है और जब blood में acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त blood दिल की नलियों में से निकल नहीं पाती और नलियों में blockage कर देता...

NAVRATRI 🙏

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The worship of the Divine Mother, Aadi Parashakti, unfolds during the sacred Navaratri, revering her in her three sublime facets: Durga, Lakshmi, and Saraswati. According to the profound wisdom of Shrimad Devi Bhagawatam, the Ashwina Navaratri is a dedicated homage to Mother Goddess Chandika, the quintessence of transcendental universal consciousness. She, indeed, is the embodiment of Bramhavidya, the very soul of cosmic knowledge. In her manifold manifestations, Chandi embodies all three of these divine aspects. As Durga, she bestows the gift of life, assuming the role of protector and bestower of health, vitality, and fortitude upon all creation. In her guise as Lakshmi, she nurtures the cosmos, weaving the tapestry of material existence and binding souls with the enchantment of Maya. Within this realm, she sustains the awareness of beings residing within physical vessels. As Lakshmi, the Devi graciously imparts worldly wisdom, igniting the flames of innovation and enligh...

SIKH HINDU

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ये तस्वीर 1908 की है अमृतसर के हरमंदिर साहेब की जिसे ईसाई वामपंथी  'गोल्डन टेंपल' कहते हैं। अब आपके मन मे ये प्रश्न उठा होगा कि हिन्दू साधु ध्यान कैसे कर रहे हैं वो भी सिख तीर्थ में? ज़रा इतिहास में चलते हैं। सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी थे।  आगे के गुरुओं का क्रम निम्नवत् है:- 2-गुरु अंगददेव 3- गुरु अमरदास 4-गुरु रामदास 5- गुरु अर्जुनदेव 6- गुरु हरगोविंद 7- गुरु हरराय 8- गुरु हरकिशन 9- गुरु तेगबहादुर 10- गुरु गोविंद सिंह सभी गुरुओं के नाम- राम, अर्जुन, गोविंद (कृष्ण), हर (महादेव) के नाम पर हैं। जब औरंग्ज़ेब ने कश्मीर के पंडितों को इस्लाम स्वीकार करने के कहा तो कश्मीरी पंडित गुरु तेगबहादुर के पास मदद के लिये गए।  गुरु तेगबहादुर ने कहा, जाओ, औरंगज़ेब से कहना, 'यदि गुरु तेगबहादुर मुस!लमान बन गया तो हम भी मुस!लमान बन जायेंगे।' ये बात पंडित लोग औरंगज़ेेब तक पहुंचा देते हैं। औरंगज़ेब गुरु तेगबहादुर को दिल्ली बुलाकर मुसलमान बनने के लिए कहता है।  गुरु द्वारा अस्वीकार करने पर उन्हें यातना दे कर मार दिया जाता है। अब प्रश्न ये कि यदि सिख हिन्दू से अलग है तो...

KAMAKHYA DEVI

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माँ कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास.... 51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है। कामाख्या देवी का मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है। कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है। इस मंदिर में देवी दुर्गा या मां अम्बे की कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखाई नहीं देगा। वल्कि मंदिर में एक कुंड बना है जो की हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। इस कुंड से हमेशा ही जल निकलता रहतै है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है और योनी भाग के यहां होने से माता यहां रजस्वला भी होती हैं। मंदिर से कई अन्य रौचक बातें जुड़ी है, आइए जनते हैं ... मंदिर धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां पर यह भाग गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया और इस जगह माता की योनी गिरी थी,...

NAATH

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जानिए, परम सिद्ध नौ नाथों को!!!!!!! नाथ शब्द का अर्थ होता है स्वामी। कुछ लोग मानते हैं कि नाग शब्द ही बिगड़कर नाथ हो गया। भारत में नाथ योगियों की परंपरा बहुत ही प्राचीन रही है। नाथ समाज हिन्दू धर्म का एक अभिन्न अंग है। नौ नाथों की परंपरा से 84 नाथ हुए। नौ नाथों के संबंध में विद्वानों में मतभेद हैं।  भगवान शंकर को आदिनाथ और दत्तात्रेय को आदिगुरु माना जाता है। इन्हीं से आगे चलकर नौ नाथ और नौ नाथ से 84 नाथ सिद्धों की परंपरा शुरू हुई। आपने अमरनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि कई तीर्थस्थलों के नाम सुने होंगे। आपने भोलेनाथ, भैरवनाथ, गोरखनाथ आदि नाम भी सुने ही होंगे। साईनाथ बाबा (शिरडी) भी नाथ योगियों की परंपरा से थे। गोगादेव, बाबा रामदेव आदि संत भी इसी परंपरा से थे। तिब्बत के सिद्ध भी नाथ परंपरा से ही थे।  सभी नाथ साधुओं का मुख्‍य स्थान हिमालय की गुफाओं में है। नागा बाबा, नाथ बाबा और सभी कमंडल, चिमटा धारण किए हुए जटाधारी बाबा शैव और शाक्त संप्रदाय के अनुयायी हैं, लेकिन गुरु दत्तात्रेय के काल में वैष्णव, शैव और शाक्त संप्रदाओं का समन्वय किया गया था। नाथ संप्रदाय की एक शाखा जैन...